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मैत्री का वनभोज
Sector 40 & 41 Noida

मैत्री का वनभोज

मौसम ठंडा मगर खुशगवार चल रहा था। यद्यपि हम अपनी पिकनिक दिसम्बर में कर चुके थे मगर हमारी एक मित्रा का न्यौता पाकर हमने उनके फार्म हाउस की सैर पर जाने का निश्चित किया। यहाँ से 50 मिनट की दूरी पर है। हमने एकसाथ जाने का निश्चित किया और बस बुक कराई। सुबह 10 बजे हम सब सेक्टर के गेट पर एकत्रा हो गए। बस की यात्रा शुरू हुई। जो लोग इस तरह मित्रा- मंडली के साथ जाते हैं वो जानते हैं कि किस तरह का आनंद उत्सर्जित होता है, खास कर तब जब कि सब एक दूसरे को भलीभांति जानते हों, मित्रा हों। हम 28 लोग थे। गाते गुनगुनाते गंतव्य पर पहुंचे। बहुत सुन्दर और खुली जगह थी। खेत में मूली गाजर और फूलों की बहार थी। झूले लगे हुए थे। कुछ झूलने चले गए, कुछ सैर पर और कुछ गुनगुनी धूप में बैठ कर गपियाने लगे। मूँगफली, रेवड़ी वगैरह शुरू हो गया। रश्मि ने (जिनका फार्म था) खेत के ताजा मूली और गाजर का सलाद तैयार करवाया था, वो भी साफ हो गया। उसके बाद ‘‘सन्नाटा’’ पीने की बारी आई। करीब 8 लीटर सन्नाटा थोड़ी देर में साफ हो गया।जिनको सन्नाटा समझ ना आए वो कृपया हम से संपर्क करें -हा हा हा।

उसके बाद मैत्राी की मूल प्रवर्ति संगीत शुरू हो गया, ढोलक साथ गई थी। निर्मल, उर्मिल, नीरा, अनूप, सुरिन्दर, रश्मि, छाया मधु, प्रेरणा, नेहा आदि ने महफिल लगा दी, साथ में डांस भी चल रहा था। कुछ लोग फोटोग्राफी में लगे हुए थे। सुधा ने निशानेबाजी का एक गेम कराया जिसका पुरूस्कार साधना ने जीता। वनभोज का भोज मैत्राी की ओर से था – आलू की सब्जी, पूरी दही बड़े, सन्नाटा। मीठे का आग्रह मधु , सुधा और अनूप की ओर से था, उनके जन्मदिन जनवरी में आते हैं। यही नहीं, रसगुल्लों की दावत हमारी मित्रा और होस्ट रश्मि ने दी। घर हो या बाहर, तम्बोला ना हो ऐसा हो नहीं सकता, सो तम्बोला भी हुआ। इस प्रकार प्रकृति के सानिध्य में चहकते हुए 5 बज गए और हमने वापसी के लिए सामान समेटा। इस लेख के जरिए भी मैं प्रिय रश्मि रोहतगी को उनके प्यार भरे आमंत्राण के लिए धन्यवाद देती हू।

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